Back
Idgah cover
1982•152 pages•Published•HIN•User Reviews

Idgah

5.0/ 5
1 ratings

About This Book

रमज़ान के पूरे तीस रोज़ों के बाद ईद आई है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभात है। वृक्षों पर कुछ अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, मानो संसार को ईद की बधाई दे रहा है। गाँव में कितनी हलचल है। ईदगाह जाने की तैयारियाँ हो रही हैं। किसी के कुरते में बटन नहीं हैं, पड़ोस के घर से सुई-तागा लेने दौड़ा जा रहा है। किसी के जूते कड़े हो गए हैं, उनमें तेल डालने के लिए तेली के घर भागा जाता है। जल्दी-जल्दी बैलों को सानी-पानी दे दें। ईदगाह से लौटते-लौटते दोपहर हो जाएगी। तीन कोस का पैदल रास्ता, फिर सैकड़ों आदमियों से मिलना-भेंटना। दोपहर के पहले लौटना असंभव है। लड़के सबसे ज्यादा प्रसन्न हैं। किसी ने एक रोज़ा रखा है, वह भी दोपहर तक, क

Track Your Reading

Sign in to save this book, track pages, log finished reads and rereads, and build your Reading Diary.

Sign In

Community Reviews

Reviews

Browse all reviews →
Sign in to review

No reviews yet. Be the first.

The Swinging Light

Book Details

First Published

1982

Pages

152 pages

Rating

5.0 / 5

Ratings

1

Editions

5

Publisher

National Book Trust

Language

HIN, URD, PAN

Status

Published

The People Behind The Book

Authors

You May Also Like

Recommended Books

Godan cover

Godan

1979

Munshi Premchand

Kafan cover

Kafan

1987

Munshi Premchand

Gaban cover

Gaban

2000

Munshi Premchand